अनछुई आग: भाग 5
आरव का कठोर शिश्न नेहा की मधुर गुफा के सबसे गहरे कोने तक पहुंच चुका था। किस अभी भी टूटा नहीं था। दोनों के होंठ एक-दूसरे में ऐसे घुले हुए थे जैसे वो एक ही सांस बन गए हों। नेहा की आंखों से सुख के आंसू बह रहे थे, लेकिन वो आंसू दर्द के नहीं, … Read more