अनछुई आग: भाग 5

आरव का कठोर शिश्न नेहा की मधुर गुफा के सबसे गहरे कोने तक पहुंच चुका था। किस अभी भी टूटा नहीं था। दोनों के होंठ एक-दूसरे में ऐसे घुले हुए थे जैसे वो एक ही सांस बन गए हों। नेहा की आंखों से सुख के आंसू बह रहे थे, लेकिन वो आंसू दर्द के नहीं, … Read more

अनछुई आग: भाग 4

नेहा का पूरा शरीर एक लंबी लहर की तरह उठा और फिर धीरे-धीरे नीचे आया। आरव का कठोर शिश्न अभी भी उसके अंदर पूरी तरह समाया हुआ था। मधुर गुफा उसे कसकर जकड़े हुए थी, जैसे कभी छोड़ना ही न चाहती हो। दोनों के शरीर पसीने से भीगे हुए थे, लेकिन वो पसीना मीठा था … Read more

अनछुई आग: भाग 3

आरव का कठोर शिश्न नेहा की रस भरी कली के द्वार पर ठहरा हुआ था। बस छू रहा था। गर्म, सख्त, और थोड़ा-थोड़ा नब्ज की तरह धड़कता हुआ। नेहा की सांसें रुक-रुककर आ रही थीं। उसकी आंखें आधी बंद थीं, लेकिन उसकी पलकें कांप रही थीं। कमरे में बारिश अब और तेज हो गई थी, … Read more

अनछुई आग: भाग 2

आरव की उंगली पैंटी के किनारे पर रुकी हुई थी। नेहा की सांसें अब पूरी तरह अनियंत्रित हो चुकी थीं। कमरे में बारिश की आवाज अब भी आ रही थी, लेकिन दोनों के कान में सिर्फ अपने दिल की धड़कन गूंज रही थी। नेहा की आंखें अभी भी बंद थीं, लेकिन उसके चेहरे पर एक … Read more

अनछुई आग: भाग 1

बारिश शुरू हुए तो जैसे आसमान ने भी उन दोनों की धड़कनों को सुन लिया हो। नेहा और आरव कॉलेज से निकलकर बस स्टॉप पर खड़े थे। आज का दिन कुछ अलग था। क्लास के बाद दोनों ने काफी देर तक कैंटीन में बैठकर बातें की थीं – पढ़ाई, भविष्य, और वो छोटी-छोटी बातें जो … Read more