अनछुई आग: भाग 4

नेहा का पूरा शरीर एक लंबी लहर की तरह उठा और फिर धीरे-धीरे नीचे आया। आरव का कठोर शिश्न अभी भी उसके अंदर पूरी तरह समाया हुआ था। मधुर गुफा उसे कसकर जकड़े हुए थी, जैसे कभी छोड़ना ही न चाहती हो। दोनों के शरीर पसीने से भीगे हुए थे, लेकिन वो पसीना मीठा था – प्यार का पसीना। बारिश की आवाज अब कमरे के कोने-कोने में भर गई थी, जैसे वो भी उनके इस पल को और निजी बना रही हो।

आरव ने अपनी कमर को एकदम स्थिर रखा। वो जानता था कि नेहा को अभी भी हर सनसनी को पूरा-पूरा महसूस करने की जरूरत है। उसने नेहा के माथे पर, फिर गालों पर, फिर होंठों पर हल्के-हल्के किस किए। हर किस के साथ वो बस थोड़ा-सा अंदर दबाव डालता, फिर रुक जाता। नेहा की आंखें आधी बंद थीं। उसके होंठ थोड़े खुले हुए थे और हर सांस के साथ एक हल्की-सी कराह निकल रही थी।

“आरव… ये… ये कैसा अहसास है…” नेहा ने कांपती आवाज में कहा। “जैसे तुम मेरे अंदर पूरी तरह बस गए हो… और मैं तुम्हें हर जगह महसूस कर रही हूं।”

आरव ने मुस्कुराकर उसके बालों में उंगलियां फेर दीं। “मुझे भी यही लग रहा है नेहा। तुम्हारी मधुर गुफा… इतनी गर्म, इतनी नरम… जैसे वो मुझे अपने अंदर घोल रही हो।” उसने बहुत धीरे से अपनी कमर हिलाई – सिर्फ एक छोटा-सा घेरा। कठोर शिश्न मधुर गुफा की दीवारों को छूता हुआ घूमा। नेहा की जांघें कांप उठीं। उसके मांसल नितंब आरव की हथेलियों के नीचे हल्के-हल्के सिकुड़ गए।

आरव ने एक हाथ नेहा के सुडौल उरोज की तरफ बढ़ाया। कोमल पहाड़ी को पूरी हथेली में भर लिया। उंगलियों से उसकी उन्नत चोटी को हल्का-हल्का दबाया, फिर घुमाया। नेहा की सांस एकदम रुक गई। उसकी कमर खुद-ब-खुद ऊपर उठ गई, जैसे आरव के कठोर शिश्न को और गहराई में ले जाना चाहती हो।

“और… वहां… हां…” नेहा ने आंखें बंद करके फुसफुसाया।

आरव ने अब गति थोड़ी और लयबद्ध कर दी, लेकिन फिर भी बहुत स्लो। हर धक्का लंबा, गहरा और सोचा-समझा हुआ था। वो पूरा अंदर जाता, फिर लंबी देर तक रुक जाता, फिर धीरे-धीरे बाहर निकलता। हर बार बाहर निकलते वक्त नेहा की रस भरी कली की पंखुड़ियां उसके कठोर शिश्न को चूमती हुईं महसूस होतीं। रस अब दोनों के बीच में हल्की-हल्की आवाज कर रहा था – बहुत धीमी, लेकिन बेहद उत्तेजक।

नेहा ने अपनी टांगें आरव की कमर के इर्द-गिर्द और कसकर लपेट लीं। उसके मांसल नितंब अब हर धक्के पर ऊपर उठते और आरव को और गहराई में खींचते। “आरव… मुझे… लग रहा है जैसे… कोई लहर बार-बार उठ रही हो… लेकिन वो रुक नहीं रही…” उसकी आवाज में अब शर्म नहीं, सिर्फ सुख था।

आरव ने अपना चेहरा नेहा की गर्दन में छुपा लिया। वहां उसकी नरम त्वचा पर किस करते हुए फुसफुसाया, “मैं तुम्हें रोकना नहीं चाहता… तुम जितना चाहो, उतना महसूस करो।” उसने अपनी गति थोड़ी और धीमी कर दी, लेकिन गहराई बढ़ा दी। अब हर धक्का इतना गहरा था कि नेहा की मधुर गुफा का आखिरी कोना भी भर जाता।

आरव ने अपना चेहरा नेहा की गर्दन में छुपा लिया। वहां उसकी नरम त्वचा पर किस करते हुए फुसफुसाया, “मैं तुम्हें रोकना नहीं चाहता… तुम जितना चाहो, उतना महसूस करो।” उसने अपनी गति थोड़ी और धीमी कर दी, लेकिन गहराई बढ़ा दी। अब हर धक्का इतना गहरा था कि नेहा की मधुर गुफा का आखिरी कोना भी भर जाता।

“आह्ह… आरव… वहां… और… हां…”

आरव ने अब दोनों कोमल पहाड़ियों को बारी-बारी चूमा, सहलाया, हल्का-हल्का दबाया। उसके कठोर शिश्न नीचे लगातार स्लो लय में अंदर-बाहर हो रहा था। नेहा का पूरा शरीर अब एक लय में हिल रहा था। रेशमी घास अब पूरी तरह भीगी हुई थी। हर बार जब आरव अंदर जाता, नेहा की जांघें कांप जातीं।

दोनों के बीच समय जैसे लंबा खिंच गया था। कोई जल्दी नहीं थी। सिर्फ स्पर्श, सिर्फ गर्मी, सिर्फ एक-दूसरे को महसूस करना। आरव ने नेहा की आंखों में देखा। “मैं तुम्हें प्यार करता हूं नेहा… इस पल से… हमेशा।”

नेहा की आंखों के कोनों से सुख के आंसू निकल आए। “मैं भी… आरव… बहुत… बहुत प्यार करती हूं।” उसने आरव को और कसकर जकड़ लिया।

आरव की गति अब थोड़ी और गहरी हो गई थी, लेकिन अभी भी बहुत धीमी। हर धक्का एक नई लहर ला रहा था। नेहा की मधुर गुफा अब और भी सिकुड़ने लगी थी। वो महसूस कर रही थी कि कुछ बहुत बड़ा आने वाला है। उसकी सांसें छोटी-छोटी और तेज हो चुकी थीं।

“आरव… मुझे… फिर से… वो… आ रहा है… लेकिन अब… और ज्यादा…” नेहा ने कराहते हुए कहा। उसके मांसल नितंब अब आरव की कमर को और जोर से दबा रहे थे।

आरव ने अपनी गति को बिल्कुल स्लो रखते हुए एक लंबा, गहरा धक्का दिया। फिर रुका। फिर फिर से। वो जानबूझकर नेहा को चरम सुख के किनारे पर ला रहा था, लेकिन जल्दी नहीं कर रहा था।

नेहा का पूरा शरीर अब कांपने लगा था। उसकी उंगलियां आरव की पीठ को और कसकर पकड़ रही थीं। “मत रुको… बस… इसी तरह… मुझे… ले चलो…”

आरव ने नेहा के होंठों को फिर से चूम लिया। किस गहरा था, लंबा था। और उसी किस के बीच उसने एक और गहरा, स्लो धक्का दिया…

भाग 4 समाप्त।

अनछुई आग: भाग 5