रात के ग्यारह बजकर पैंतीस मिनट पर दिल्ली स्टेशन से ट्रेन धीरे-धीरे खिसकने लगी थी। ये दिल्ली से मुंबई जाने वाली एसी टू टियर ट्रेन थी, डिब्बा नंबर तीन। हल्की सी झुमक के साथ ट्रेन ने अपनी यात्रा शुरू की। बाहर प्लेटफॉर्म की रोशनी पीछे छूट रही थी और अंदर डिब्बे में एक गहरी शांति फैल गई थी। ज्यादातर यात्री पहले ही अपनी बर्थ पर लेट चुके थे।
ऊपरी बर्थ पर नयना लेटी हुई थी। चौबीस साल की यह युवती सॉफ्टवेयर इंजीनियर थी। अकेली ट्रिप पर जा रही थी। उसने हल्की नीली सलवार-कमीज़ पहन रखी थी, जिसकी नरम कपास उसकी नाजुक देह को हल्के से लपेटे हुए थी। उसके लंबे बाल खुले हुए थे और चेहरे पर थोड़ी थकान की छाया दिख रही थी। ट्रेन के चलने के बाद उसने अपना बैग साइड में ठीक किया, मोबाइल पर कुछ देर एक किताब पढ़ने की कोशिश की, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। उसने लाइट बंद कर दी और आंखें मूंद लीं।
नीचे वाली बर्थ पर मोहित लेटा था। अट्ठाईस साल का यह युवक फिट और आकर्षक था। हल्की दाढ़ी उसके चेहरे को और भी मर्दाना बना रही थी। सफेद टी-शर्ट और ब्लैक ट्रैक पैंट में वह आराम से लेटा था। वह भी अकेला सफर कर रहा था। ट्रेन चलने के बाद उसने अपना लैपटॉप बंद किया, पानी पीया और कंबल ओढ़ लिया। दोनों के बीच कोई खास बातचीत नहीं हुई थी। सिर्फ जब ट्रेन चलने लगी थी, तब उनकी नजरें एक पल के लिए मिली थीं और दोनों ने हल्के से मुस्कुरा दिया था।
ट्रेन की रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ने लगी। बाहर की दुनिया तेजी से पीछे छूट रही थी। डिब्बे में एसी की ठंडक धीरे-धीरे गहराती जा रही थी। शुरू में तो नयना ने इसे इग्नोर कर दिया। वह सोने की कोशिश में करवट बदल रही थी। लेकिन आधे घंटे बाद उसका शरीर हल्का-हल्का कांपने लगा। पतला कंबल उसकी ठंड को रोक नहीं पा रहा था। हड्डियों तक ठिठुरन महसूस हो रही थी। उसने पैरों को सिकोड़ लिया, फिर दोनों हाथों से अपनी छाती को कसकर पकड़ लिया।
नीचे से मोहित की नरम आवाज आई, “बहन जी, ठंड बहुत लग रही है क्या?”
नयना ने थोड़ा सा झुककर नीचे देखा। मोहित का चेहरा ट्रेन की हल्की रोशनी में साफ दिख रहा था। उसकी आंखों में सच्ची चिंता थी।
“हां… एसी काफी तेज है। कंबल भी बहुत पतला पड़ रहा है,” नयना ने धीरे से कहा। उसकी आवाज में ठंड की वजह से हल्की कांपती हुई लय थी।
मोहित ने बिना देर किए अपना मोटा कंबल उतारा। वह गर्म और मुलायम था।
“ये लो। मैं अपना यही यूज कर लूंगा।”
नयना ने कंबल ले लिया लेकिन मन में थोड़ी झिझक महसूस हुई।
“लेकिन आप ठंड में कैसे सोएंगे? यह ठीक नहीं है।”
मोहित हल्के से मुस्कुराया। उसकी मुस्कान में एक नरम आश्वासन था।
“तो… एक साथ शेयर कर लें? बर्थ थोड़ी बड़ी है। हम दोनों आसानी से फिट हो जाएंगे।”
नयना ने एक पल सोचा। ट्रेन की झुमकती हुई गति, ठंड और मोहित की सौम्य आवाज – सब कुछ उसे अंदर से छू रहा था। उसने हल्का सा सिर हिलाया।
“ठीक है… आ जाओ।”
मोहित धीरे से उठा। उसने अपना फोन और पानी की बोतल साइड में रखा। फिर ऊपर चढ़ गया। बर्थ पर जगह थोड़ी तंग थी, लेकिन दोनों के लिए काफी थी। नयना ने खुद को दीवार की तरफ सरका लिया। मोहित कंबल को दोनों के ऊपर अच्छे से फैलाकर लेट गया। शुरू में उनके शरीरों के बीच थोड़ी दूरी थी। सिर्फ कंधे हल्के से छू रहे थे।
नयना की पीठ मोहित की तरफ थी। उसकी सांसें अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं। मोहित का शरीर गर्म था। कंबल की गर्माहट और उसकी निकटता से नयना को राहत मिलने लगी। लेकिन जैसे-जैसे मिनट गुजरते गए, वैसे-वैसे उनके शरीर अनजाने में ही एक-दूसरे से और सटते गए। मोहित की बांह हल्के से नयना की कमर के पास आ गई।
“अभी भी कांप रही हो?” मोहित ने बहुत धीरे से, लगभग फुसफुसाते हुए पूछा। उसकी आवाज नयना के कान के पास गूंज रही थी।
नयना ने आंखें बंद रखते हुए हल्का सा सिर हिलाया।
“थोड़ा सा… लेकिन अब बेहतर लग रहा है।”
मोहित की उंगलियां धीरे-धीरे उसकी कमीज़ के ऊपर से पेट पर घूमने लगीं। नरम-नरम, गोल-गोल। नयना का शरीर एक पल के लिए सिहर गया, लेकिन वह हटी नहीं। मोहित ने अपनी बांह को थोड़ा और कस लिया। अब उनकी देहें लगभग एक-दूसरे से चिपक गई थीं।
नयना की सांसें थोड़ी भारी हो गईं। वह कुछ बोलना चाहती थी, लेकिन शब्द नहीं निकले। मोहित ने धीरे से पूछा, “रुकूं?”
नयना ने बस आंखें बंद करके सिर हिला दिया। “नहीं…”
मोहित की उंगलियां अब कमीज़ के अंदर चली गईं। नयना की नरम, गर्म त्वचा पर सीधा स्पर्श। उसकी उंगलियां धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ीं। ब्रा के कप को हल्के से सरकाया। नयना के नरम और उभरे हुए स्तन अब पूरी तरह खुले थे। मोहित ने एक को पूरा हाथ में ले लिया। बहुत धीरे-धीरे, प्यार से मसलने लगा। अंगूठे से उसकी निप्पल को हल्के हल्के घुमाने लगा। नयना की सांसें अब तेज हो चुकी थीं। उसके स्तन सख्त हो रहे थे और एक अनजानी गर्मी उसके शरीर में फैल रही थी।
नयना ने अपना एक हाथ पीछे ले जाकर मोहित की जांघ पर रख दिया। ट्रैक पैंट के ऊपर से ही उसकी मजबूत मांसपेशियां महसूस हो रही थीं। फिर धीरे से हाथ ऊपर सरकाया। मोहित की ट्रैक पैंट के अंदर। वहां उसकी मर्दानी ताकत पहले से ही सख्त और गर्म हो चुकी थी। नयना ने उसे हल्के से हाथ में लिया। गर्म, मोटी और लंबी। उसने बहुत धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करना शुरू किया। मोहित के मुंह से हल्की सी आह निकली।
“बहुत अच्छा लग रहा है नयना…” मोहित ने उसके कान में फुसफुसाया।
नयना ने आंखें बंद रखीं। ट्रेन की झुमकती गति उनके शरीरों को और पास ला रही थी। मोहित ने अब नयना की सलवार का नादा ढीला किया। उसकी उंगली धीरे से अंदर घुसी। नयना की पैंटी पहले से ही नम हो चुकी थी। उसने पैंटी को साइड किया और सीधे उसकी नरम और गीली जगह पर उंगली फेरी। नयना का पूरा शरीर एक झटके से सिहर गया।
“उफ्फ… मोहित…” नयना की आवाज कांप रही थी।
मोहित ने उंगली बहुत धीरे से अंदर डाली। इंच-इंच करके। अंदर-बाहर। फिर दो उंगलियां। नयना की वो जगह अब पूरी तरह गीली और गर्म थी। मोहित की उंगलियां अंदर-बाहर होती रहीं। कभी-कभी उसकी सबसे संवेदनशील जगह पर रुककर हल्के घुमाव से छेड़ने लगतीं। नयना की सांसें फूल चुकी थीं। वह मोहित की जांघ को और जोर से पकड़ रही थी।
ट्रेन किसी छोटे स्टेशन पर रुक गई। बाहर प्लेटफॉर्म की रोशनी हल्की सी अंदर आ रही थी। डिब्बे में गहरी शांति थी। कोई जागा नहीं था। मोहित ने नयना को अपनी तरफ घुमाया। अब दोनों आमने-सामने थे। उसने नयना के होंठों पर धीरे से किस किया। पहले तो बस होठों को छुआ। फिर धीरे-धीरे गहरा किस। उनकी जीभें एक-दूसरे में घुलने लगीं। नयना ने मोहित की टी-शर्ट ऊपर खींची और उसकी छाती पर हाथ फेरने लगी।
किसिंग के बीच मोहित ने नयना की सलवार को पूरी तरह नीचे सरका दिया। पैंटी भी उतार दी। नयना ने खुद मदद की। अब वह कमर से नीचे पूरी तरह खुले थी। मोहित ने अपनी ट्रैक पैंट और अंडरवियर दोनों नीचे कर दिए। उसकी मर्दानी ताकत अब पूरी तरह खड़ी थी और नयना की जांघों से हल्का-हल्का टकरा रही थी।
नयना ने धीरे से कहा, “चुपके से… कोई देख न ले…”
मोहित ने उसे कंबल में अच्छे से लपेट लिया। फिर नयना को अपनी गोद में बिठा लिया। नयना ने एक पैर हल्का सा फैलाया। मोहित की गर्म और सख्त ताकत उसकी नरम और गीली जगह के मुंह पर रगड़ खा रही थी। मोहित ने बहुत धीरे से सिर दबाया। बस टिप अंदर गई। नयना ने आह भरी।
“आह्ह्ह… धीरे…”
मोहित ने बहुत स्लो मोशन से पूरा अंदर डाला। इंच-इंच करके। नयना की वो जगह उसे पूरी तरह निचोड़ रही थी। दोनों के शरीर एक-दूसरे से चिपक गए। ट्रेन फिर से चल पड़ी। हर झटके के साथ मोहित की मर्दानी ताकत अंदर-बाहर होने लगी। बहुत धीमा, लेकिन गहरा। नयना मोहित के कंधे पर अपना मुंह दबाए हुए थी। दांत हल्के से गड़ा रही थी।
मोहित एक हाथ से उसके नरम स्तनों को मसल रहा था। दूसरे हाथ से उसकी कमर को पकड़ रखी थी। वह नीचे से धीरे-धीरे ऊपर की तरफ धक्के दे रहा था। नयना की नरम जगह से नमी निकलकर दोनों की जांघों को गीला कर रही थी। ट्रेन की गति बढ़ने के साथ उनका रिदम भी धीरे-धीरे तेज होता गया, लेकिन अभी भी पूरी तरह स्लो और कंट्रोल में था।
नयना ने फुसफुसाया, “और गहरा… हां… ऐसे ही…”
मोहित ने अब पोजीशन बदली। नयना को थोड़ा सा साइड किया। अब वह उसके पीछे से जुड़ गया था। स्पूनिंग स्टाइल। एक हाथ से स्तनों को दबाते हुए, दूसरा हाथ उसकी नरम जगह पर रखकर उसकी सबसे संवेदनशील कली को हल्के से रगड़ रहा था। नयना का पूरा शरीर कांप रहा था। उसकी सांसें तेज हो चुकी थीं।
कुछ लंबे मिनट बाद नयना का शरीर अचानक सख्त हो गया। उसने कंबल में मुंह दबाकर जोर से आह भरी। उसकी नरम जगह सिकुड़ गई। वह पहली बार झड़ गई। गर्म तरल मोहित की उंगलियों पर बह गया।
मोहित ने रुकने नहीं दिया। उसने धीरे से नयना को फिर से अपनी तरफ घुमाया। अब वह ऊपर आ गया। मिशनरी पोजीशन, लेकिन बहुत सावधानी से। बर्थ पर जगह कम थी इसलिए वह नयना को कंबल में अच्छे से लपेटे हुए था। उसने फिर से अंदर डाला। इस बार थोड़ा तेज लेकिन अभी भी पूरा कंट्रोल में।
नयना की आंखें बंद थीं। वह मोहित की पीठ पर नाखून हल्के से गड़ा रही थी।
“मोहित… मुझे फिर से आने वाला है…”
मोहित ने गति बढ़ाई। ट्रेन की झुमक के साथ-साथ। नयना की नरम जगह फिर से सिकुड़ी। इस बार और तेज। वह दूसरी बार झड़ गई। मोहित भी अब किनारे पर था। उसने नयना के कान में फुसफुसाया, “मैं अंदर ही…”
नयना ने बस सिर हिला दिया। मोहित ने आखिरी कुछ धक्के दिए और पूरी तरह अंदर झड़ गया। गर्म वीर्य नयना की गहराई में भर गया। दोनों थककर एक-दूसरे से चिपके रहे। सांसें भारी थीं। पसीना उनकी त्वचा पर चमक रहा था।
ट्रेन अब तेज रफ्तार पर थी। बाहर अंधेरा था। डिब्बे में सिर्फ उनकी सांसों की आवाज थी।
मोहित ने नयना के माथे पर हल्का किस किया।
“अभी तो पूरी रात बाकी है नयना…”
नयना ने शरमाते हुए मुस्कुराया। उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर मोहित की मर्दानी ताकत को फिर से पकड़ लिया। वह अभी भी आधा सख्त था।
“तो फिर शुरू करते हैं… लेकिन इस बार मैं ऊपर आऊंगी…”
दोनों ने कंबल को फिर से ठीक किया। नयना मोहित के ऊपर चढ़ गई। अब वह सवार थी। उसने धीरे से मोहित की गर्म ताकत को अपनी नरम जगह में लिया। इस बार वह खुद कंट्रोल कर रही थी। बहुत धीरे-धीरे ऊपर-नीचे। मोहित उसके नरम स्तनों को चूस रहा था। कभी हल्का सा काट रहा था। नयना की जगह फिर से गीली हो चुकी थी।
रात भर ट्रेन चलती रही। स्टेशन आते-जाते रहे। लेकिन डिब्बे में नयना और मोहित की दुनिया अलग थी। उन्होंने कई बार और जुड़ाव महसूस किया। हर बार अलग-अलग तरीके से। कभी सिर्फ उंगलियों और होंठों से, कभी पूरा शरीर एक-दूसरे में घुलकर। हर स्पर्श में समय लेते हुए, हर सांस को महसूस करते हुए।
सुबह के पांच बज रहे थे जब ट्रेन मुंबई के पास पहुंच रही थी। नयना और मोहित अभी भी एक-दूसरे से चिपके हुए थे। कंबल में लिपटे। नयना ने मोहित की छाती पर सिर रखा था।
मोहित ने उसके बालों में हाथ फेरा।
“ये सफर कभी नहीं भूलूंगा…”
नयना ने आंखें बंद करते हुए मुस्कुराया।
“मैं भी नहीं…”
ट्रेन धीरे-धीरे प्लेटफॉर्म पर रुकने लगी। दोनों ने जल्दी से कपड़े ठीक किए। लेकिन उनकी नजरें एक-दूसरे से अलग नहीं हो रही थीं। सफर खत्म हो रहा था, लेकिन वो रात उनकी यादों में हमेशा ताजा रहेगी।